'Zero time lag' to be the goal; noose to tighten around cyber fraudsters.

‘जीरो टाइम लैग’ होगा लक्ष्य, साइबर ठगों पर कसेगा शिकंजा

‘जीरो टाइम लैग’ होगा लक्ष्य, साइबर ठगों पर कसेगा शिकंजा

त्वरित गति से रुके ठगी की रकम, बैंकों का प्रतिक्रिया समय हो न्यूनतम – मुख्य सचिव

मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक ने SLBC समन्वय बैठक में दिए निर्देश, 190 बैंक शाखाओं पर होगी AI की पैनी नजर

* राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की विशेष साइबर समन्वय बैठक सचिवालय में सम्पन्न
* 1930 हेल्पलाइन और बैंकों के बीच रिस्पॉन्स टाइम होगा शून्य के करीब
* संदिग्ध खातों की केंद्रीकृत निगरानी व्यवस्था से आमजन को मिलेगी बड़ी राहत
* पीड़ितों को राशि वापसी की प्रक्रिया होगी और अधिक तीव्र व सुगम
– बुधवार को सभी बैंकों के प्रतिनिधि करेंगे पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 कॉल सेंटर का दौरा

जयपुर, 22 जुलाई। राज्य में साइबर सुरक्षा तंत्र को और सुदृढ़ बनाने तथा आमजन के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मंगलवार को शासन सचिवालय में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की विशेष साइबर समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा तथा राजस्थान पुलिस एवं प्रमुख बैंकों के अधिकारियों ने भाग लेकर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम हेतु ठोस एवं परिणाम-मूलक रणनीति तय की।

मुख्य सचिव ने कहा कि 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही बैंकों की प्रतिक्रिया तीव्र होनी चाहिए तथा नागरिक की शिकायत और खाता होल्ड की कार्रवाई के बीच का समय-अंतराल पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दस में से मात्र एक मामले में ही बैंकों की त्वरित प्रतिक्रिया से राशि रुक पाना गंभीर विषय है, इसलिए इस दिशा में सभी बैंक अधिकारी स्वयं 1930 कॉल सेंटर का दौरा कर नागरिकों की समस्याओं को नजदीक से समझें और पुलिस के साथ हैंडस-ऑन समन्वय स्थापित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक एवं समयबद्ध प्रयासों से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा और प्रदेश डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा साइबर सुरक्षा एवं म्यूल अकाउंट्स की रोकथाम हेतु समय-समय पर जारी उत्कृष्ट दिशा-निर्देशों का ज़मीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित संदिग्ध खातों एवं हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं की केंद्रीकृत डेटाबेस व्यवस्था तथा जिला स्तर पर नियमित समन्वय बैठकों से बैंक अधिकारियों और साइबर पुलिस के बीच बेहतर जवाबदेही और तालमेल सुनिश्चित होगा, जिसका सीधा लाभ आमजन को मिलेगा। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों व अपराधियों के प्रति राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति, आर4सी के प्रभावी क्रियान्वयन और जनजागरूकता के लिए भी राजस्थान पुलिस प्रतिबद्ध है ताकि आमजन को साइबर अपराधों की गिरफ्त में आने से बचाया जा सके।

बैंक प्रतिनिधि करेंगे 1930 कॉल सेंटर दौरा –

मुख्य सचिव ने बताया कि निर्देशों की अनुपालना में बुधवार को सभी बैंकों के प्रतिनिधि पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 कॉल सेंटर का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरे के माध्यम से बैंक अधिकारी कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, शिकायत निस्तारण प्रक्रिया एवं नागरिकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को नजदीक से समझ सकेंगे, जिससे आगे की कार्यवाही और अधिक प्रभावी व त्वरित हो सकेगी।

केवाईसी अपडेशन एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष बल –

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर ठग प्रायः केवाईसी अपडेट के नाम पर फर्जी कॉल, एसएमएस या लिंक भेजकर आमजन को झांसे में लेते हैं, अतः बैंक ग्राहकों तक केवाईसी संबंधी सूचनाएं केवल सत्यापित माध्यमों से ही पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगी के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं, इसलिए बैंक शाखाओं में उनके लिए विशेष सहायता काउंटर स्थापित कर उन्हें डिजिटल लेन-देन में सतर्कता बरतने हेतु व्यक्तिगत रूप से जागरूक किया जाए।

बैठक में तय की गई प्रमुख पहल –

बैठक में निर्णय लिया गया कि वरिष्ठ बैंक अधिकारी एवं नोडल प्रतिनिधि 1930 साइबर कंट्रोल रूम का अवलोकन कर त्वरित खाता होल्डिंग प्रक्रिया को और सुगम बनाएंगे। पुलिस मुख्यालय एवं साइबर रिस्पॉन्स सेंटर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक तथा यूनियन बैंक सहित प्रमुख बैंकों के नोडल प्रतिनिधियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। बिना भौतिक सत्यापन के 10 से 50 करोड़ रुपये तक की सीमा वाले चालू खाते खोलने की परिपाटी पर रोक लगाते हुएव उच्च-जोखिम खातों का सुव्यवस्थित पुन: सत्यापन किया जाएगा। प्रदेश की 190 चिन्हित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं तथा संदिग्ध एटीएम बिंदुओं पर एआई आधारित निगरानी एवं स्थानीय पुलिस द्वारा औचक निरीक्षण से सतर्कता तंत्र और मजबूत होगा।

पीड़ितों को राहत एवं जन-जागरूकता –

मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) और ग्रीवांस रिड्रेशल पोर्टल (GRM) के माध्यम से पीड़ित नागरिकों को 50 हजार रुपये तक की राशि तथा अदालती आदेशों के तहत रोकी गई राशि शीघ्र लौटाने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही भारी नकद निकासी या फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पूर्व तुड़वाने की स्थिति में सुरक्षात्मक सत्यापन व्यवस्था लागू करने तथा खाता किराए पर देने के खतरों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे आमजन साइबर ठगी से स्वयं को सुरक्षित रख सकें।

राज्य सरकार, राजस्थान पुलिस और बैंकिंग तंत्र के इस समन्वित प्रयास से प्रदेश में एक सुरक्षित एवं भरोसेमंद डिजिटल बैंकिंग वातावरण का निर्माण होगा। किसी भी वित्तीय साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।

बैठक में गृह विभाग, वित्त विभाग तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित SLBC संयोजक बैंक तथा भाग लेने वाले सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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