जिला कलक्टर ने राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का किया अवलोकन

जिला कलक्टर ने राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का किया अवलोकन

जिला कलक्टर ने राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का किया अवलोकन

देशी-विदेशी शोधार्थियों को केन्द्र का मिले अधिक से अधिक लाभ

बीकानेर, 18 जुलाई। जिला कलक्टर श्री निशान्त जैन ने शुक्रवार को राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का अवलोकन किया। उन्होंने यहां संरक्षित 29 हजार से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित रखने की व्यवस्था और प्रणाली की जानकारी ली।

उन्होंने प्राकृत, राजस्थानी, हिन्दी और संस्कृत भाषा की पांडुलिपियों की त्रिस्तरीय संरक्षण प्रक्रिया के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा का लम्बे समय तक संरक्षित और सुरक्षित रहें, इसके मद्देनजर इनका वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुसार परिरक्षण जरूरी है। इसके मद्देनजर उन्होंने यहां परिरक्षण लेबोरेट्री स्थापित करने के प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाने के निर्देश दिए और कहा कि इससे बीकानेर संभाग की लाखों पांडुलिपियों का और अधिक बेहतर तरीके से संरक्षण हो सकेगा। उन्होंने विभागीय प्रकाशन का अवलोकन भी किया।

प्रतिष्ठान द्वारा नैणसी की ख्यात, सीताराम लालस का शब्दकोष, बांकीदास की ख्यात सहित अब तक 217 से अधिक प्रकाशन किए गए हैं। राजस्थानी साहित्य में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने प्रकाशनों का कैटलाॅग देखा। साथ ही यहां देश और दुनिया से आने वाले शोधार्थियों के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि बीकानेर के इस केन्द्र को शोध एवं संदर्भ सामग्री के दृष्टिकोण से माॅडल केन्द्र बनाया जाए। जिला कलक्टर ने पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन कार्य का अवलोकन किया। उन्होंने ज्ञान भारतम मिशन के कार्य में भी प्रगति लाने के निर्देश दिए।

प्रतिष्ठान निदेशक डाॅ. नितिन गोयल ने केन्द्र की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केन्द्र द्वारा प्रदेश की पहली एआई आधारित कांफ्रेंस आयोजित की गई। उन्होंने केन्द्र की ‘सुनी, लिखी, पढ़ी व्याख्यान’ श्रृंखला के बारे में बताया।

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