संपादक जगदीश यायावर
दायित्व-बोध के साथ अपने दृष्टिकोण को लक्ष्य की दिशा में अग्रसर करें- प्रो. शैलेश एन. झाला,
लाडनूं में ‘विकसित भारत @ 2047 : युवा एवं शिक्षक सपने से सिद्धि की ओर’ विषय पर व्याख्यान आयोजित
Direct your perspective toward your goal with a sense of responsibility — Prof. Shailesh N. Jhala
लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान के जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के अंतर्गत संचालित महादेवलाल सरावगी अनेकांत शोधपीठ के तत्त्वावधान में पूनमचंद भूतोड़िया व्याख्यानमाला का आयोजन गुरुवार को विश्वविद्यालय स्थित आचार्य महाश्रमण ऑडिटोरियम में किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस व्याख्यान माला में पश्चिमी क्षेत्रीय समिति आईसीटीई, भारत सरकार नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. शैलेश एन. झाला ने ‘विकसित भारत @ 2047 : युवा एवं शिक्षक सपने से सिद्धि की ओर’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रो. झाला ने व्याख्यान के दौरान कहा कि युवा वर्ग एवं शिक्षकों को स्वतंत्र भारत की एक शताब्दी की अवधि में भारत के गौरव को पुनः प्रतिष्ठापित करने के लिए लक्ष्य की पूर्ति हेतु तत्पर होना चाहिए। उन्होंने लक्ष्य सिद्धि के सम्बन्ध में उनके निर्वहन योग्य दायित्वों का भी बोध कराया तथा वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हुए दृष्टिकोण को लक्ष्य की दिशा में अग्रसर करने का निर्देश दिया।
विकसित भारत के लिए मूल्य शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण
कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि मूल्य शिक्षा एवं विकसित भारत के संदर्भ में आचार्य महाप्रज्ञ का चिन्तन बहुत पूर्व ही सामने आ चुका था, जिसका सन्दर्शन हमें उनकी महत्वपूर्ण रचना ‘महावीर का अर्थशास्त्र’ में होता है। उन्होंने प्रोफेसर झाला के चिंतन को शिक्षक एवं छात्र वर्ग के लिए प्रेरणादायी बताया। व्याख्यानमाला कार्यक्रम का शुभारंभ मुमुक्षु बहनों द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत करके किया गया। अतिथिगण ने पूनमचंद भूतोड़िया के चित्र पर माल्यार्पण किया। कुलपति प्रो. बचछराज दूगड़ ने मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रोफेसर शैलेश एन. झाला (अध्यक्ष पश्चिमी क्षेत्रीय समिति आईसीटीई, भारत सरकार, नई दिल्ली) का स्वागत किया। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एल. जैन ने स्वागत भाषण के साथ प्रोफेसर झाला का परिचय प्रस्तुत किया। अंत में कुलसचिव देवाशीष गोस्वामी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अहिंसा एवं शांति विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने किया। इस अवसर पर आईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. शैलेश एन. झाला ने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के साथ विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के दर्शन कर उनके विषय से सम्बन्धित चर्चा कर उनके विचारों से अवगत हुए।
Direct your perspective toward your goal with a sense of responsibility — Prof. Shailesh N. Jhala
