राजस्थान के थार मरुस्थल की एक खास झाड़ी खींंप (Leptadenia pyrotechnica) अब भारत की सौर ऊर्जा क्रांति, मिट्टी की गुणवत्ता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन देने के लिए उभर रही है। खींंप के विविध लाभों की वजह से इसे राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर नीतिगत प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
A special shrub of Thar has brought new life to the rural economy.
सौर ऊर्जा के लिए वरदानसरकार वर्ष 2030 तक 450-500 GW सौर बिजली उत्पादन का लक्ष्य लेकर राजस्थान और गुजरात में बड़े पैमाने पर सौर पार्क स्थापित कर रही है। लेकिन इन परियोजनाओं को रेत का बहाव, धूल जमाव, भूमि का कटाव तथा गर्मी की समस्या का सामना करना पड़ता है। खींंप की 1-1.5 मीटर की ऊंचाई और गहरी जड़ें रेत को 60-70% तक रोकती हैं। यह न तो पैनलों पर छाया डालती है और न ही ज्यादा पानी मांगती है।
मिट्टी और किसान हित मेंभारत की कृषि भूमि पहले ही 40% जैविक कार्बन खो चुकी है, जिससे फसलों में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है। पश्चिमी राजस्थान के खेतों में हुए परीक्षणों के अनुसार, खींंप से बनी होम्योपैथिक दवाएं और औषधियां मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाकर किसानों की उपज 20-40% तक बढ़ा सकती हैं। सिंचाई की जरूरत 25-35% तक कम हो सकती है, और मिट्टी का कार्बन स्तर सिर्फ एक सीजन में 0.20% से 0.35–0.40% तक बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य और औद्योगिक संभावनाएंखींंप से बनी दवाएं एंटीमाइक्रोबियल और घाव भरने वाली होती हैं; इसका प्रयोग पुराने दर्द व अस्थमा में भी राहत देने में होता है। इसके साथ ही, खींंप ग्रामीण उद्योगों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है — जैव-उत्प्रेरक, जैव-कीटनाशक, हर्बल स्किनकेयर, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग, फाइबर उत्पाद और पोषण संबंधी उत्पाद बनाने में इसका उपयोग हो सकता है।
नीतिगत जरुरत और भविष्यविशेषज्ञों का कहना है कि खींंप को राष्ट्रीय सौर पार्क लैंडस्कैपिंग, मरुस्थल हरियाली कार्यक्रम, एग्री-वोल्टाइक मॉडल और ग्रामीण उद्योग योजनाओं में शामिल किया जाए। खींंप आधारित हरित अर्थव्यवस्था से रोजगार और उत्पादकता दोनों बढ़ सकते हैं। थार ने इस पौधे को चुपचाप पनपाया है, अब वक्त है इसे राष्ट्रीय नीति के केन्द्र में लाया जाए ताकि भारत की सौर परियोजनाएं, मिट्टी और ग्रामीण जीवन अधिक मजबूत हो सकें।
A special shrub of Thar has brought new life to the rural economy.
डॉ अमित व्यास बीकानेर
