ई-कचरे से प्रकृति को बचाने हेतु अपनाएं ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ का थ्री-आर मंत्र- प्रो. बी.एल. जैन

ई-कचरे से प्रकृति को बचाने हेतु अपनाएं ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ का थ्री-आर मंत्र- प्रो. बी.एल. जैन

संपादक जगदीश यायावर लाडनूं

ई-कचरे से प्रकृति को बचाने हेतु अपनाएं ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ का थ्री-आर मंत्र- प्रो. बी.एल. जैन
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में कार्यान्वयन एवं संग्रह चरण के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित
फोटो सं. 4: केप्शन: लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में ‘ई-कचरा प्रबंधन: चुनौतियां और समाधान’ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए प्रो. बीएल जैन।
लाडनूं। डिजिटल क्रांति के इस दौर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बढ़ता उपयोग पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसी विषय की गंभीरता को रेखांकित करने के लिए जैन विश्व भारती संस्थान के शिक्षा विभाग में ‘ई-कचरा प्रबंधन: चुनौतियां और समाधान’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एल. जैन ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए आज हर नागरिक को ई-कचरे के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत दुनिया के शीर्ष ई-कचरा उत्पादक देशों में शामिल हो चुका है। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए हमें अपनी जीवनशैली में ‘थ्री-आर’ यानी रिड्यूस, रियूज और रिसायकिल के सिद्धांत को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा। रिड्यूस द्वारा उपभोक्ता अपनी वास्तविक आवश्यकताओं को समझें और केवल आधुनिक मॉडल की होड़ में नए गैजेट्स खरीदने की प्रवृत्ति को कम करें। रीयूज से काम कर रहे पुराने फोन, कंप्यूटर या अन्य उपकरणों को फेंकने के बजाय समाज के जरूरतमंद तबके को दान करें या मरम्मत कराकर पुनः उपयोग में लाएं। रिसाइकिल से जो उपकरण पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके हैं, उन्हें सामान्य कचरे में न डाल कर केवल सरकार द्वारा अधिकृत ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर्स या पंजीकृत रिसाइकिलर्स को ही सौंपें। प्रो. जैन ने आगाह किया कि कंप्यूटर, मोबाइल, चार्जर और टीवी जैसे उपकरणों में सीसा, पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं होती हैं। जब इस कचरे को अनौपचारिक रूप से खुले में जलाया या नष्ट किया जाता है, तो ये रसायन मिट्टी और भूजल में मिलकर मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। कार्बन मुक्त हरित परिसर अभियान के जरिए विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना जागृत कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित संकाय सदस्यों और भावी शिक्षकों ने अपने दैनिक जीवन में जिम्मेदारी से ई-कचरे का निपटारा करने तथा समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. गिरिराज भोजक ने सभी का आभार ज्ञापित किया कार्यक्रम में डॉ. अमिता जैन, डॉ. मनीष भटनागर, डॉ.विष्णु कुमार, डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, स्नेहा शर्मा, डॉ. देवीलाल कुमावत, डॉ. अनुजा उपस्थित रहे।

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