Kati Chakrasana for relief from back pain

Kati Chakrasana for relief from back pain by yog guru DhakaRam

कमर दर्द से राहत के लिए कटि चक्रासन

कटि चक्रासन के बारे में बात करेंगे। कटि का मतलब होता है कमर और चक्रासन का मतलब होता है गोलाकार घूमना। यह एक योग क्रिया है जो कमर को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करती है। यह कमर दर्द को दूर करने के लिए भी बहुत फायदेमंद है। कटी का मतलब कमर चक्र का मतलब गोलाकार अपनी कमर को चक्र की भांति गोलाकार घूमना इसीलिए इसका नाम कटि चक्रासन है।
कैसे करें कटि चक्रासन:
• कटि चक्रासन के लिए हम दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फुट का फैसला रखेंगे।
• पैरों के पंजे थोड़ा सा अंदर की तरफ रखेंगे और एड़ियों को थोड़ा सा बाहर की तरफ रखेंगे।
• अपने हाथों को जांघों पर रखेंगे धीरे-धीरे हाथों को ऊपर उठा कर कंधों के बराबर ले जाएंगे।
• दोनों हाथों को अच्छी तरह तानेंगे दाएं हाथ को दाई तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को बाई तरफ खींचेंगे और श्वास छोड़ते हुए हम दाहिनी तरफ कमर को मरोड़ देंगे।
• दाहिने हाथ को धीरे से कमर के पीछे से लाकर बाई तरफ की पसलियों पर रख देंगे और उंगलियों से नाभि को छूने का प्रयास करेंगेऔर बाएं हाथ को हम दाहिने कंधे पर बहुत ही हल्के हाथों से रखेंगे। हमारी कमर को ज्यादा से ज्यादा मरोड़ने की कोशिश करेंगे। कम से कम हम एक मिनट दाहिनी तरफ इसी अवस्था में रहेंगे।
• धीरे-धीरे हम जैसे गए थे वैसे हम वापस आएंगे और हाथों को जांघों के ऊपर रख देंगे और आधा मिनट हम अपने आसन को करने के बाद क्या परिवर्तन हुआ है उसे महसूस करेंगे।

• एक तरफ करने के बाद विश्राम करना जरूरी है ताकि एक तरफ करने का जो खिंचाव है वह हमारे दूसरी तरफ आसान करने पर ना पड़े।
• अब हम इसे दूसरी तरफ दोहराएंगे।दोनों हाथों को हम धीरे-धीरे अपने बगल से उठाएंगे। दोनों हाथों को बगल में तान देंगे।
• दाहिने हाथ को हम दाई तरफ खींचेंगे और बाएं हाथ को हम बाई तरफ खींचेंगे। धीरे-धीरे अब हम श्वास छोड़ते हुए कमर को घुमाएंगे।
• अब धीरे-धीरे बाएं हाथ को हम कमर के पीछे से दाहिनी तरफ की पसलियां पर रखेंगे और उंगलियों से नाभि छूने का प्रयास करेंगे और दाएं हाथ को हम बाएं कंधे पर हल्के से रखेंगे और इसी अवस्था में हम 1 मिनट तक रुकेंगे।
• 1 मिनट पूरा होने के बाद हम जैसे आसन में गए थे वैसे ही धीरे-धीरे हम आसान से बाहर आएंगे। हम आधा मिनट विश्राम करेंगे और जब हम विश्राम करेंगे तो हम हमारे शरीर में हुए परिवर्तन का अवलोकन करेंगे।
कटि चक्रासन के लाभ:
• कमर को मजबूत और लचीला बनाता है।
• कमर दर्द को दूर करता है।
• मेरुदंड को स्वस्थ रखता है।
• गुर्दे, यकृत और अग्नाशय को स्वस्थ रखता है।
• पाचन क्रिया को बेहतर करता है।

कटि चक्रासन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:
• पैरों में एक से डेढ़ फीट का फासला होना चाहिए सरल भाषा में कहीं तो कंधे जितना फासला।
• पंजे थोड़े से अंदर की तरफ और एड़ियां थोडी सी बाहर की तरफ होनी चाहिए।
• जैसे हम आसन में गए थे वैसे ही हमें आसान से वापस आना चाहिए।
• कटि चक्रासन में हमें अपने कंधों को थोड़ा ऊपर की ओर उठा कर समान रखना चाहिए न की ऊपर नीचे।
• कटि चक्रासन में शरीर को घुमाते समय हमें कोशिश करनी है कि हमारे कमर से नीचे का हिस्सा नहीं घूमें।
• अपने हाथों से नाभि को छूने की कोशिश करनी चाहिए मतलब जब दाहिनी तरफ मरोड़े तब दाहिने हाथ बाई ओर से और जब बाई तरफ से मरोड़े तब बाई ओर से दाहिने पीछे से नाभि छूने का प्रयास करेंगे।

कटि चक्रासन के बाद क्या करें:
• आसन को करने के बाद उसका आंखें बंद करके अवलोकन अवश्य करें।
• कम से कम आधा मिनट तक आराम करें।
निष्कर्ष:
कटि चक्रासन एक सरल लेकिन प्रभावी योग क्रिया है जो कमर के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। नियमित रूप से कटि चक्रासन करने से आप कमर दर्द से छुटकारा पा सकते हैं और अपनी कमर को मजबूत और लचीला बना सकते हैं।
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योगाचार्य ढाका राम
संस्थापक, योगापीस संस्थान

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